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Thursday, 29 July 2021

इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के विरोध में 15 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे

कैलाश सिंह विकास वाराणसी


इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के विरोध में  15 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे


वाराणसी। विद्युत कर्मचारी सँयुक्त संघर्ष समिति के आज वाराणसी  में विद्युत प्रशिक्षण संस्था, भिखारीपुर, हाइडिल कॉलोनी में  हुए प्रान्तीय सम्मेलन मे प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि यदि  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 वापस न लिया गया तो देश के 15  लाख बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों के साथ उत्तर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियन्ता आगामी 10 अगस्त को एक दिन की हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे।    
  
संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, प्रभात सिंह, जय प्रकाश, चन्द्रशेखर चौरसिया, जवाहर लाल विश्वकर्मा, मायाशंकर तिवारी, ए0पी0 शुक्ला, ए0के0 श्रीवास्तव, आर0के0 वाही, राजेन्द्र सिंह, जियूत लाल, मनीष श्रीवास्तव, राम कुमार झा, विसम्बर सिंह, विरेन्द्र सिंह, केदार तिवारी, सुनील कुमार यादव, संजय भारती,अंकुर पांडेय जगदीश पटेल, संतोष वर्मा, सूर्यदेव पाण्डेय, नीरज बिंद आदि ने आज यहां  बताया कि केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 संसद में रखने और पारित करने का एलान किया है अतः निजीकरण हेतु लाये जा रहे इस बिल के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया गया है।   
वाराणसी में हुए सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए संघर्ष समिति के प्रमुख  पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिजली कानून में व्यापक बदलाव वाले इस बिल को जल्दबाजी में पारित करने के बजाये इसे संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाना चाहिए और कमेटी के सामने बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपने विचार रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
      
 
  उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उत्पादन का लाइसेन्स समाप्त कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का निजीकरण किया गया जिसके  परिणाम स्वरुप देश की जनता को निजी घरानों से बहुत महंगी बिजली की मार झेलनी पड़ रही है। अब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के जरिये बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त समाप्त की जा रही है जिससे बिजली वितरण के सम्पूर्ण निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इस बिल में प्राविधान है कि किसी भी क्षेत्र में एक से अधिक बिजली कम्पनियाँ बिना लाइसेंस लिए कार्य कर सकेंगी और बिजली वितरण हेतु यह निजी कम्पनियाँ सरकारी वितरण कंम्पनी का इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क इस्तेमाल करेंगी। 

उन्होंने बताया कि निजी कम्पनियाँ केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देंगीजिससे  सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय हालत और खराब हो जाएगी। इस प्रकार नए बिल के जरिये सरकार बिजली वितरण का सम्पूर्ण निजीकरण करने जा रही है जो किसानों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।         
उन्होंने बताया कि इस बिल के विरोध में 27 जुलाई को नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भारत सरकार के विद्युत सचिव आलोक कुमार से मिलकर अपना विरोध दर्ज कर दिया है। 03 अगस्त को उत्तरी क्षेत्र ,04 अगस्त को पूर्वी क्षेत्र ,05 अगस्त को पश्चिमी क्षेत्र और 06 अगस्त को दक्षिणी क्षेत्र के बिजली कर्मी दिल्ली में श्रम शक्ति भवन पर सत्याग्रह करेंगे। इसके बाद 10 अगस्त को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार ने 10 अगस्त के पहले संसद में बिल रखा तो देश भर के  बिजली कर्मी उसी दिन हड़ताल करेंगे।
आज वाराणसी में हुए प्रान्तीय सम्मेलन की अध्यक्षता इं0 चन्द्रशेखर चौरसिया एवं संचालन श्री राजेन्द्र सिंह ने किया।


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