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Thursday, 29 July 2021

जिले के आला अधिकारियों से लगाया गुहार, फिर भी खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर है सहतवार का राजभर परिवार

रिपोर्ट -माइकल भारद्वाज बलिया

जिले के आला अधिकारियों से लगाया गुहार, फिर भी खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर है सहतवार का राजभर परिवार

बलिया /सहतवार- जनपद बलिया के सहतवार नगर पंचायत के वार्ड नंबर-5 के निवासी लालजी राजभर का परिवार जमीन के सभी कागजात सही होने के बावजूद बरसात के मौसम में खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। 
हमारे जनपद बलिया संवाददाता माइकल भारद्वाज से बात करते हुए पीड़ित परिवार ने बताया कि अब हम कहां जाएं, किससे अपनी फरियाद सुनाए, समझ में नहीं आ रहा है ।कई सालों से हम थाने से लेकर कोर्ट-कचहरी दौड़ते- दौड़ते परेशान हो गए हैं। जब जब हम कोर्ट कचहरी जाते हैं तब तब ऐसा ऐसा लगता है कि जो हमारा पीएम आवास आया है अब हमारी जमीन पर इनकी मदद से बन जाएगी लेकिन जो भी अधिकारी आता है उससे निराशा ही मिलती है। वैसे भी हम गरीबों को कौन पूछता इस जमाने में? किसी भी कार्य के लिए पैसे की जरूरत है और अफसोस कि यही मेरे पास नहीं है।

कैमरे के सामने अपने दर्द को बयां करते हुए पीड़ित परिवार ने कहा कि आज कई सालों से हमारा पीएम आवास आया हुआ है। हम लक्ष्मीना देवी पत्नी राम जी राजभर, शांति देवी पत्नी गोपालजी राजभर, मीना देवी पत्नी लालजी राजभर तीनों के नाम से पीएम आवास आया हुआ है तथा हम अपनी मोरिस की भूमि भूमिधरी  जिसमें ससुर के नाम से है इसमें आ.न. 1081 रकबा 0.0 45 हेक्टेअर मौजा सहतवार में  नींव भी काट लिए हैं। यह नींव एसडीओ बांसडीह के आदेश से सीमांकन के बाद काटा गया है, फिर भी प्रतिवादी छोटक, विजय पुत्र स्व. महावीर भर, डब्लू, कृष्णा पुत्र स्व. रघु चौहान निवासी स्थानीय दबंगई के बल पर इस भूमिधरी से कोई वास्ता सरोकार ना होते हुए भी हमर निर्माण कार्य रुकवा दिए हैं। हम लोग 15 अक्टूबर 2019 से एसडीएम महोदय को कई बार प्रार्थना पत्र दिए लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई और ना मेरा घर बना। जबकि कानूनगो की आख्या रिपोर्ट दिनांक 22 सितंबर 2020 है। जिसमें स्पष्ट लिखा है कि आ.न. 1081 से प्रतिवादीगण का कोई वास्ता नहीं है। फिर भी रोक दिया गया है। यदि हमारी जमीन पर आया हुआ पीएम आवास का निर्माण नहीं हुआ तो हम गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे कब तक जिएंगे। बारिश का मौसम है तिरपाल लगाकर जैसे तैसे हम सभी अपना जीवन कीचड़ में यापन कर रहे हैं। प्रशासनिक लोग हमारी आकर झोपड़ियों को देखें। वह भी गिरने के कगार पर है। फिर भी प्रतिवादीगण द्वारा दूसरों के बहकावे में आकर 144 यूपीआरसी के तहत मुकदमा दर्ज किए हैं तथा लेखपाल की आख्या रिपोर्ट 29 अगस्त 2020 में भी स्पष्ट वर्णित है कि प्रार्थिनीगण रिहायशी झोपड़ी में निवास करते हैं। जो अख्या 1081 में है उसी में निर्माण हो रहा था फिर भी प्रतिवादीगण द्वारा रोक दिया गया।

पीएम आवास की पहली किस्त उठाकरन नींव काटकर पिलर भी काम कर लिए हैं ,दूसरी किस्त भी बैंक में आ गया है ,यदि दोबारा कार्य चालू नहीं हुआ तो किस्त का पैसा शासन को वापस लौट जाएगा और हम सभी अपने जीने की आस छोड़ देंगे

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