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Wednesday, 28 July 2021

योगी सरकार में हक की बात करना गुनाह हो गया है - सुधांशु बाजपेयी

लखनऊ ब्यूरो

योगी सरकार में हक की बात करना गुनाह हो गया है - सुधांशु बाजपेयी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस कर्मी पिछले एक हफ्ते से हड़ताल पर हैं लेकिन सरकार उनकी माँगें मानने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है, जो कि सरकारी की तानाशाही मानसिकता को दिखाता है। 23 जुलाई से प्रदेश के सभी जिलों में 102 और 108 एंबुलेंस के सभी कर्मचारी के द्वारा अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की गई थी।  प्रारंभ में 3 दिनों तक यह हड़ताल मात्र सांकेतिक की थी लेकिन जब सरकार और शासन प्रशासन के द्वारा इसको गंभीरता से नहीं लिया गया तब विवशतावश कर्मचारियों के द्वारा जिलों में चक्का जाम किया गया।
 
कांग्रेस प्रवक्ता सुधांशु बाजपेयी ने बताया कि सिर्फ एंबुलेंस सेवा ही नहीं उ प्र में पूरे स्वास्थ्य विभाग को ठेके पर चलाया जा रहा है, हर विभाग में कंपनियाँ कर्मचारियों का शोषण कर रहीं हैं, उनकी सुनने वाला कोई नहीं, इस बैकडोर से निजीकरण के चलते जनता को भी स्वास्थ्य सुविधाएं महँगी मिल रहीं, ऊपर से उत्तम सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं,ठेका व्यवस्था के कर्मियों और जनता दोनों का शोषण होता है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुधान्शु बाजपेयी ने आगे कहा कि वर्तमान संकट के लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार है, सरकार हस्तक्षेप कर कर्मियों को न्याय दिलाने के बजाय कंपनी के साथ खड़ी हो गयी। ऐसे में एंबुलेंस कर्मियों के लिए न्याय की उम्मीद बेमानी हो जाती है,जबकि पिछले कई महीनों से वेतन और तमाम अन्य सुविधाएं न मिलने की शिकायत कर्मी कंपनी के साथ ही सरकार से भी कर रहे थे, न कंपनी ने सुनीं न सरकार ने अंततः विवश होकर उन्हें यह रास्ता अपनाना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि  कल तक जो कोरोना योद्धा थे, हक माँगने पर उन्हीं पर मुकदमे और एस्मा लगाया जा रहा, योगी सरकार में हक की बात करना गुनाह हो गया है। योगी सरकार के अहंकार के चलते ही उप्र की जीवनधारा 108 और 102सेवा थम गयी है। सरकार संवाद के बजाय दमन पर उतारू है। दमन का रास्ता तानाशाही की ओर ले जाता है। एंबुलेंस कर्मियों की बात सुनने के बजाए योगी सरकार उनको डरा धमका रही है, योगी सरकार का योगी सरकार यह रवैया असंवेदनशील है।
एंबुलेंस कर्मियों के प्रति बर्ताव से स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति सरकार की संवेदनहीनता का पता चलता है, लोकतंत्र और व्यवस्था की बेहतरी का रास्ता कर्मचारियों से संवाद कर समस्याओं के हल से निकलेगा, दमन से नही।  सरकार अहंकार त्यागे, एंबुलेंस कर्मियों की बात सुने। स्वास्थ्य विभाग ही नहीं स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी यह जरूरी है।  

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