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Monday, 16 August 2021

कुछ आतंकियों के सामने अफगानिस्तान का घुटने टेकना कहां तक सच

कृपा शंकर चौधरी मुख्य संपादक तहकीकात न्यूज़

कुछ आतंकियों के सामने अफगानिस्तान का घुटने टेकना कहां तक सच

क्या हो सकता है अफगानिस्तान का भविष्य


अफगानिस्तान पर तालिबान के चंद लड़ाकों द्वारा 22 दिनों में कब्जा कर लेना। 20 वर्षों में लाखों करोड़ों खर्च कर अमेरिका द्वारा एक लोकतांत्रिक एवं अपने पैरों पर खड़ा करने वाले देश अफगानिस्तान द्वारा लाखों सैनिक होने के बावजूद तालिबान के चंद लड़ाकों के सामने घुटने टेकना आश्चर्य एवं प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आखिर क्या हुआ कि मजबूती के बावजूद लोकतांत्रिक देश अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी एवं अन्य जिम्मेदारों ने अपने नागरिकों को बहसी तालिबान के सामने छोड़ दिया।

दिल दहला देने वाले तमाम दृश्यों के साथ अफगानिस्तान का अब क्या होगा प्रश्न उठता है और लोग यह सोचते पर मजबूर हैं कि तालिबान को ऐसे कदम उठाने के पीछे कौन है। मौजूदा समय की बात करें तो चीन रूस के बयान मायने रखता है जिसमें चीन द्वारा तालीबान सरकार से मैत्रीपूर्ण व्यवहार की कामना की गई और रूस द्वारा अपने राजनयिक कार्यालय को बंद न करना कहा गया।
पाकिस्तान की भूमिका पर बात करें तो विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान भी तालीबान की मदद कर रहा है। आतंकियों की फैक्ट्री का तमगा हासिल करने वाली पाकिस्तानी सेना सदैव विश्व पटल पर सुर्खियां में रही है और अपना कुनबा बढ़ाने में आतंकियों की मदद करता रहा है।


लोग जानना चाहते हैं कि ऐसा 20 वर्षों पहले क्या था कि वर्तमान समय में लोग अपने प्राणों की बाजी लगा कर मात्रभूमि छोड़ने पर मजबूर हैं। दरअसल पहले तालिबान द्वारा तमाम ऐसे नियम बनाए गए थे जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था न के बराबर थी। जैसे 10 वर्ष से अधिक उम्र की लड़की पढ़ाई नहीं कर सकती, अकेले घर से बाहर  नहीं निकल सकती, आप कबूतर पतंग नहीं उड़ा सकते,डीजे फिल्म पर प्रतिबंध और चोरी आदि अपराध पर बिना सुनवाई के बीच चौराहे पर हाथ पैर काट लेना यह तालिबानी हुकुमत का कुछ नियमावली है। वर्तमान समय में अफगानिस्तान से मिले विडियो में एक बात चौंकाने वाली है कि देश छोड़ भागने वालों में 99% पुरुष है जिन्होंने अपनी पत्नियों और बच्चियों को छोड़ अपने प्राणों की फ़िक्र की है। इस तरह के सोच यह साबित करती है कि अब भी वहां के लोगों में महिलाओं के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है और वह केवल चीज मात्र है।

अफगानिस्तान के भविष्य की बात करें तो इस समय तालिबान के इस कदम से विश्व के तमाम देश चिंतित हैं और UNSC की भारत की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई है।

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