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Thursday, 19 August 2021

अंतर्कलह से चौरीचौरा विधानसभा सीट गवाएगी भाजपा

कृपा शंकर चौधरी मुख्य संपादक तहकीकात न्यूज़

अंतर्कलह से चौरीचौरा विधानसभा सीट गवाएगी भाजपा

गोरखपुर।  दूल्हा अभी घोड़ी से उतरा नहीं कि सहबलिए घोड़ी पर चढ़ाई करने लगे तो घोड़ी का बिदकना तो जायज़ है। ऐसा ही कुछ हो रहा है चौरीचौरा विधानसभा में भाजपा के साथ। 

आपकों बता दें गत विधानसभा चुनाव में चौरीचौरा विधानसभा से   भाजपा की उम्मीदवार संगीता यादव रही और उन्होंने उस सीट से विजय भी हासिल किया। किन्तु हिन्दू युवा वाहिनी की गढ़ रही इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा द्वारा संगीता यादव को प्रत्याशी बनाने पर कुछ लोगो को  यह रास नहीं आया और संगीता यादव से वे सदैव असंतुष्ट दिखे। चुकी विधानसभा चुनाव 2022 अव करीब आ रहा है साथ ही  लोगों की टकराहट भी उजागर होने लगा है और यही कारण है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दिशा-निर्देशों के विपरित  इन नेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर होर्डिंग लगाकर प्रचार शुरू कर दिया गया है।

पिछले विधानसभा चुनाव में विकास के मुद्दे पर चुनाव में आई भाजपा को लोगों ने सर आंखों पर लिया और नतीजा विजय प्राप्त करने के रूप में भी मिला और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से जनता के भारी समर्थन से संगीता यादव विजयी हुई। चुकी संगीता यादव द्वारा कहा जाता है कि उनके द्वारा काफी काम कराया गया फिर भी शायद उनकी पहुंच गरीबों और असहायों के उन जरुरतों तक नहीं पहुंच पाई जिसके वे हकदार थे यही कारण है कि कुछ हिस्सा उनसे नाखुश भी है। 

चुकी बात प्रतिद्वंदिता की है तो आपको बताना चाहेंगे कि अपने आप को दावेदार प्रत्याशी के रूप में साबित करने के चक्कर में नये दावेदारों द्वारा अपने एक दुसरे के गड़े मुर्दे भी उखाड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। इस तरह की चर्चाएं भावी प्रत्याशियों के राजनीतिक जीवन पर प्रभाव डालेगी साथ ही पार्टी की  छवि भी धूमिल होगी और अंततः पार्टी को सीट गंवा कर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है ।

  आपको अवगत कराना चाहेंगे कि जातिगत समीकरण रखने वाली इस चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में यादव, निषाद, मौर्या की संख्या ज्यादा है और पीछले चुनाव में इस गणित को भाजपा द्वारा भुनाया भी गया किन्तु अब अपने आप को भाजपा के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करने वाले इन नेताओं के जातिगत समीकरण न मिलने पर भी प्रत्याशी बनाया गया तब भी सीट गंवाने की गुंजाइश ज्यादा है।

अनुभवी बताते हैं कि जब-जब एक ही विधानसभा से एक ही पार्टी के कई प्रत्याशी दावेदार होते हैं तो अंततः चुनाव के दरम्यान अंतर्कलह से विपक्षी पार्टी को फायदा होता है और जीतती पार्टी को नुक्सान का सामना करना पड़ता है।


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