समग्र विकास के लिए जाति मजहब से उपर उठकर मानवतावाद की आवश्यकता - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News

आज का Tahkikat

Thursday, 9 September 2021

समग्र विकास के लिए जाति मजहब से उपर उठकर मानवतावाद की आवश्यकता

कृपा शंकर चौधरी

समग्र विकास के लिए जाति मजहब से उपर उठकर मानवतावाद की आवश्यकता


जब भी कोई सरकार बनती है तो गरीब और अमीर सरकार से उम्मीद करते हैं कि शायद इस बार उनके दिन पलटेंगे। किन्तु अलग अलग जाति धर्म के समावेश उपरांत बना लोकतांत्रिक देश भारत के वह तमाम लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं जो वास्तव में जिसके हकदार हैं।

 ऐसा नहीं है कि इस प्रथा को समाप्त नहीं किया जा सकता चिंता इस बात की है की जो इसे समाप्त नहीं करना चाहते उन्ही के हाथों में इसे बदलने का पावर मिला हुआ है। बदलने वालोें की आजिविका इस प्रथा पर टिकी होने के कारण वह कभी नहीं चाहते कि इसमें कोई परिवर्तन हो।

परिवर्तन होने के उपरांत उज्ज्वल भविष्य को देखने वाले इस पर चर्चा करना शुरू कर चुके हैं और वह बताते हैं कि विकास इन संकीर्ण मानसिकता के चलते उपर नहीं उठ पा रहा है। उनका मानना है कि अब जाति-धर्म से उपर उठकर मानवतावाद पर केन्द्रित होकर कुछ अलग करने की आवश्यकता है। 

जाति धर्म विकास में कैसे बाधक

अलग-अलग जाति मजहब में बिखरा मानव समाज लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण स्वार्थसिद्धि की सोच रखने वाले नेता रूपी मदारियों के चंगुल में इस कदर फंस गया है कि उसे लगता है कि जो मदारी कहता है वहीं सही है। जनता की आंखों पर पट्टी इस प्रकार बंधी है कि वह यह नहीं देखना चाहता है कि उसी के साथ का व्यक्ति नेता बनने के बाद अब लग्जरी कार और करोड़ों का मालिक बन चुका है।
दरअसल भारतीय राजनीति में जाति धर्म को केन्द्र बनाकर सत्ता हासिल करने का मंत्र अपनाया जाता है। ऐसा होने से दूसरी जाति धर्म के लोगों का उतना विकास नहीं हो पाता जितना के वे हकदार होते हैं। सरकारी विभाग से उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है।
इन सब कारणों से हमें जाति मजहब से उपर उठकर मानवतावाद पर केन्द्रित होकर सोचने की आवश्यकता है और राजनीति के स्तर पर भी परिवर्तन की दरकार है।

विकास हेतु अमीर और गरीब में बांट कर क्यों न बने रणनीति

यदि हम अमीर और गरीब की बात करते हैं तो हर जाति धर्म मजहब में लोग दिखाई देते हैं और हमें पता चलता है कि अमुक व्यक्ति इस जाति धर्म मजहब से ताल्लुक रखता है। इस अमीर और गरीब को छांटने का तरीका भी सरकार के पास है किन्तु तुच्छ राजनीति के शिकार बेबस गरीबों को अब भी न्याय की दरकार है।

स्वार्थसिद्धि की सोच से उपर उठकर इस मुद्दे पर एक कठोर कानून की आवश्यकता है और उससे पहले अच्छी तरह से प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करने और सत्यता से वाकिफ कराने की जरूरत है। अमीर गरीब को आधार बनाकर योजनाओ को क्रियान्वित करने पर हर तबका अपने अधिकारों को पाएगा और खुशहाल रहेगा। कहा जाता है जिस देश की जनता खुशहाल जीवन व्यतीत करती है वह देश भी तरक्की पर अग्रसर होता है।

धार्मिक रूढ़िवादिता से बाहर निकलने की आवश्यकता

संसार का कोई धर्म मनुष्यता भूलने की सलाह नहीं देता। समय काल के अनुसार कुछ ऐसी बातें जरूर होती है जो उस समय के अनुसार सही थी किन्तु परिवर्तन रुपी संसार के इस समय के लिए वह सुविधा जनक न हो। इस दशा में लकीर के फकीर बनने की जगह परिवर्तन की आवश्यकता है। 

सच्चाई पर जाएं तो मानव धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं और सब धर्म इसी में समाहित है। अव आवश्यकता इस बात की है कि सरकार इन सब से उपर उठकर मानव समाज को दो हिस्सों गरीब अमीर में बांटकर योजना लागू करें ताकि देश का समग्र विकास हो सके।


No comments:

Post a Comment

तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।