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Tuesday, 7 September 2021

गोण्डा में आनन्द मार्ग द्वारा किया गया आभा सेवा सदन का उद्घाटन और प्रयागराज में आचार्य संजीवानंद अवधूत ने बताया कौशिकी का महत्व

डेस्क न्यूज़

गोण्डा में आनन्द मार्ग द्वारा किया गया आभा सेवा सदन का उद्घाटन और प्रयागराज में आचार्य संजीवानंद अवधूत ने बताया कौशिकी का महत्व

आनंद मार्ग प्रचारक संघ पोर्टरगंज गोण्डा शाखा के तत्वाधान में आनंद मार्ग यूनिवर्शल रिलीफ टीम ग्लोबल(अमूर्त ग्लोबल) के अंतर्गत आभा सेवा सदन निःशुल्क धर्मार्थ होमियो चिकित्सा केंद्र का उदघाटन अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र बाबा नाम केवलं अखंड कीर्तन एकप्रहर ( तीन घंटे ) प्रातः 9.00 बजे से 12.00बजे तक गायन के पश्चात योगध्यान साधना से किया गया।इस अवसर पर केंद्र से पधारे आनंद मार्ग सेवादल के सेक्रेटरी जेनरल(ए.एस.डी एस.जी) आचार्य नभातितानंद अवधूत के साथ रीजनल सेक्रेटरी प्रयागराज आचार्य संजीवानंद अवधूत मार्ग गुरु प्रेरणा स्रोत श्री श्री आनंदमूर्ति जी की प्रतिकृति के ऊपर मालार्पन देकर किया।इसके बाद आचार्य जी ने योगध्यान केसाथ अनदममार्ग यूनिवर्शल रिलीफ टीम ग्लोबल किस तरह से विश्व मे विभिन्न सेवाकार्यों की चर्चा के साथ पटना,पूर्णिया,व बिहार के अन्य बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में सेवा कार्य  रांची,जमशेदपुर झारखंड में भोजन केसाथ आई कैम्प हो रहा है आदि वर्णन किये।आज का यह चिकित्सा केन्द्र आभा सेवा सदन सभी तरह से क्षेत्र वाशी के लिए सुखमय,निरोगमय व सार्थक हो कि शुभकामनाएं दिए।इस कार्य कार्य को रूप देने के लिए प्रत्येक रविवार को सायं 3बजे से5बजे तक डॉ श्री कांत त्रिपाठी के साथ डॉ श्री मनीष श्रीवास्त्व जी सेवा कार्य देगें।केन्द्र को व्यवस्थित करने में भुक्तिप्रधान गोण्डा श्री बाल मुकुंद श्रीवास्तव, डी एस अयोध्या आचार्य पुन्यजीत ब्रह्मचारी के साथ सभी गोण्डा भुक्ति समिति के सदस्य गण का सहयोग सराहनीय रहा।
अंत मे सभी आये हुए आगंतुको को कोरोना से बचने के लिए सरकार का निर्देश के साथ नशा मुक्ति ,स्वास्थ्य व स्वच्छता पर आचार्य जी ने प्रकाश डालते हुए सात्विक आहार ही भोजन में लेने के लिए विशेष बल दिए।इस चिकित्सा शिविर में सैकड़ो व्यक्ति लाभांवित हुए।
प्रयागराज में आचार्य संजीवानंद अवधूत ने बताया कौशिकी का महत्व

मम्फोर्डगंज प्रयागराज 6 सितंबर । आनंद मार्ग जाग्रति एवं आनंद मार्ग  स्कूल  में 6 सितंबर दिन सोमवार को कौशिकी दिवस पूरे  विश्व के देश,प्रदेश,जिले के प्रत्येक ग्राम के घर घर मे मनाया गया।  साधकों ने बड़ी तन्मयता से अभ्यास किया और प्रतियोगिता में भाग लिया।आनंद मार्ग के प्रवर्तक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने आज ही के दिन 6 सितंबर 1978 को कौशिकी नृत्य का प्रवर्तन किया था।
कौशिकी नृत्य की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए रिजनल सेक्रेटरी प्रयागराज आचार्य संजीवानंद अवधूत ने कहा कि भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी  कौशिकी नृत्य के जन्मदाता हैं। यह नृत्य शारीरिक और मानसिक रोगों की औषधि है। विशेषकर महिला जनित रोगों के लिए रामबाण है ।
 इस नृत्य के अभ्यास से 22 रोग दूर होते हैं। सिर से पैर तक अंग- प्रत्यंग और ग्रंथियों का व्यायाम होता है। मनुष्य दीर्घायु होता है ।यह नृत्य महिलाओं के सु प्रसव में सहायक है। मेरुदंड के लचीलेपन की रक्षा करता है ।मेरुदंड, कंधे ,कमर, हाथ और अन्य  संधि स्थलों का वात रोग दूर होता है। मन की दृढ़ता और प्रखरता में वृद्धि होती है । महिलाओं के अनियमित ऋतुस्राव जनित त्रुटियां दूर करता है । ब्लाडर और मूत्र नली में के रोगों को दूर करता है। देह के अंग-प्रत्यंगों पर अधिकतर नियंत्रण आता है ।मुख् मंडल और त्वचा की दीप्ति और सौंदर्य वृद्धि में सहायकहै। कौशिकी नृत्य  त्वचा पर परी झुर्रियों को ठीक करता है । आलस्य दूर भगाता है । नींद की कमी के रोग को ठीक करता है । हिस्टीरिया रोग को ठीक करता है । भय की भावना को दूर कर के  मन में साहस जगाता है। निराशा को दूर करता है। अपनी अभिव्यंजना  क्षमता और दक्षता वृद्धि में सहायक है । रीड में दर्द, अर्श, हर्निया, हाइड्रोसील ,स्नायु यंत्रणा ,और स्नायु दुर्बलता को दूर करता है। किडनी, गालब्लैडर, गैस्ट्राइटिस, डिस्पेप्सिया, एसिडिटी ,डिसेंट्री ,सिफलिस, स्थूलता ,कृशता और लीवर की त्रुटियों को दूर करने में सहायता प्रदान करता है। 75 से 80 वर्ष की उम्र तक शरीर की कार्य दक्षता को बनाए रखता है ।

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